❤️श्री राधे गोविंद❤️

 
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जै श्रीवृन्दावन घन नव निकुंज में संतत बिराजत जोरी।अति अगाध महिमा रस जिनकौ सो पैयत इक कृपा किसोरी।।सुक नारद से भक्त मुक्त सनकादिक सुहृदनि हूँ तें चोरी।श्रीबिहारीदास जस कहैं कहाँ लौं रसना सहस तऊ मति थोरी।- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की बानीश्री वृन्दावन के नित्य नव निकुंज में सहज ही युगल सरकार बिराजते हैं और अत्यंत रहस्मय रस बरसाते हैं। यह रस अगाध है और इसकी महिमा का वर्णन करना असंभव है, इस रस को केवल एक मात्र निकुंजेश्वरी किशोरी श्री राधा रानी की कृपा से ही पिया जा सकता है। यह रस अत्यंत दुर्लभ है जो शुकदेव, नारद, भक्त, मुक्त एवं सुह्रद इत्यादि से भी छिपा हुआ है। श्री बिहरिन देव जी कहते हैं कि इस वृंदावन के विलक्षण रस को वर्णन करने में उनकी रसना एवं बुद्धि असमर्थ है।Jai Shri Vrindavan Nav Nikunj Mein Santat Birajat Jori,Ati Agadh Mahima Ras Jinko, So Peevat Eik Kripa Kishori.Suka Narad See Bhakt Mukt Sankadik Suhridani Hun Tein Chori.Shri Biharidas Jas Kahein Kahan Laun Rasna Sahas Tau Mati Thori - Shri Biharin Dev - Shri Biharin Dev Ji Ki VaniIn the beautiful Nikunj forest at Vrindavan, the ever-youthful Radha Krishna continues to shower ever-new mysterious bliss. The glory of this infinite bliss is indescribable. One can drink this bliss by the grace of one and only, Nikunjeshwari Shri Radha, the one who is the superintendent of Nikunj. The bliss which is rarely obtained and hidden from the great devotees like Shukdeva Paramhans, Shri Narada, Lord Sanak group (Sanaka, Sanatana, Sanat-kumara and Sanandana), dear friends and servants of Shri Krishn etc. Shri Biharin Dev says, “It's impossible for him to describe the glories of the bliss of Vrindavan through his tongue and mind”.
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